Sunday, January 22, 2017

 जड़ों से जुड़ा हुआ है.
जबकि उत्तर भारत में हम तेजी से अपनी संस्कृति-परम्पराओं से कटते जा रहे हैं, दिखावा हावी हो रहा है. बड़े ही व्यवस्थित तरीके से काँग्रेस-वामपंथ और मिशनरी के साहित्य-किताबों ने दिमागों में सेकुलरिज़्म और गुलामी भर दी है. आज यहाँ "छिछोरा" भास्कर होली पर पानी बचाओ, या दीवाली पर पटाखे न जलाओ का कोई अभियान छेड़ता है, तो सबसे पहले आमिर खान, अमिताभ बच्चन जैसे लोग उसके समर्थन में आगे आ जाते हैं. कई बुद्धिजीवियों की तरह इन उत्तर भारतीय सितारों को भी यह डर सताता है कि कहीं परम्पराओं का समर्थन करने पर उन्हें "दकियानूस" अथवा हिन्दू त्यौहारों का समर्थन करने पर "हिंदूवादी" न समझ लिया जाए...
संक्षेप में :- मनुष्य को हिजड़ा बनाने के लिए उसका बंध्याकरण करना जरूरी नहीं है, बस उसे मानसिक रूप से हिजड़ा बना दो. सेकुलरिज्म के पैरोकारों और वामपंथी लेखकों-इतिहासकारों ने हिंदुओं में यह काम बखूबी किया है.
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तमिलनाडु ने हमें एक राह दिखाई है... क्या उत्तर-पश्चिम-पूर्वी भारत के लोग कुछ सीखेंगे... क्या एकजुट होकर इस NGOवादी वामपंथी-मिशनरी गिरोह के खिलाफ बिना किसी संकोच के उठ खड़े होंगे??
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Victory to Tamilian Hindus !!
They showed the UNITY what for North Indian Hindus are in urgent need to show FOR protests on Dugapujo, Diwali and now Saraswati Poojo in Kolkata now !!
Similar ways for ban on slaughter houses !!

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